Anuraag K. Singh रक्षाबंधन बंधन से वंदन है, चन्दन से अभिनंदन है, ज्योति से श्वास है, अक्षत से विश्वास है, जल सा तक़रार है, मीठे सा प्यार है, रक्षा ही उपहार है, बनता हाथ ही तलवार है। ईश्वर की आज्ञा है, रक्षा की प्रतिज्ञा है, सुन... 27 Aug 2026
Aditya Singh धर्म Literature धर्म ! धर धीरज किया था जो कर्म , सार्वत्रिक था जो नर्म , किया स्थापित जिसने संस्कृति को , संजोया जिसने पुरखो के स्मृति , बना दिया विकृति किसी ने इस पुरखो के सुकृति को, बाट दिया इस धरा के इं... 22 Aug 2026