बंधन से वंदन है,
चन्दन से अभिनंदन है,
ज्योति से श्वास है,
अक्षत से विश्वास है,
जल सा तक़रार है,
मीठे सा प्यार है,
रक्षा ही उपहार है,
बनता हाथ ही तलवार है।
ईश्वर की आज्ञा है,
रक्षा की प्रतिज्ञा है,
सुनते ही क्रन्दन चीत्कार
बने हाथों के तलवार,
रख उस डोरी का मान,
चाहे हो जाए युद्ध घमासान,
मस्तक पर ले स्नेह का ढाल,
अर्पित करदे अपनी जान।
आदित्य सिंह
(अविदित)